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Made in India

Why is the boycott of Chinese products and self-reliance of India is necessary?

चीनी उत्पादों का बहिष्कार एवं आत्म निर्भरता क्यों आवश्यक?





भूमंडलीकरण(globalization) एवं उदारीकरण (liberalization)को अमलीजामा पहनाने के विश्व समुदाय द्वारा (मारकेश संधि 1995 मे) पूर्व के गैट (General Agreement on Tariffs and Trade--1947) के स्थान पर विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization –WTO)का गठन किया गया। जिसके संप्रति 164 सदस्य देश हैं तथा 24 पर्यवेक्षक देश हैं। जिसका मुख्यालय जिनेवा में है। WTO अपने 164 सदस्यों के व्यापारॉ,सेवाओं एवं निवेशों का नियमन,प्रोत्साहन,विवादों का निपटारण आदि का कार्य करता है।इसके अनुसार प्रत्येक सदस्य देश अपने बाजार को व्यापार ,सेवा एवं निवेश हेतु दूसरे सदस्य देशों के लिए खुला रखेगा,उसे व्यापार करने से नही रोकेगा। भारत भी WTO का सदस्य है। वह WTO के सदस्य देश जिसमें चीन भी शामिल है ,को अपने यहाँ व्यापार करने से रोक नहीं सकता है।कोई ज्यादा टैरिफ या टैक्स नहीं लगा सकता है,हालांकि कुछ शक्तिशाली देश WTO के निर्देशों के उल्लंघन करते पाये गए हैं।




वर्तमान में चीन विश्व का कारख़ाना एवं विकास का इंजन बन गया है। चीन के सस्ते श्रम शक्ति एवं सस्ते उत्पादों से विश्व बाजार अटे पड़े हैं,सब जगह चाइना मेड बस्तुयें ही दिखाई पड़ती हैं। जबकि इस कोरोना काल में लगभग सभी देश गंभीर आर्थिक मंदी से गुजर रहे हैं। लोगों की नौकरियाँ जा रही हैं,देशों के विकास दर तेजी से नीचे जा रहे हैं,इसी वक्त चीन इसका लाभ उठाते हुये आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है,विश्व का सबसे धनी सरकार 950 अरब डालर के साथ चीन बना हुआ है। विश्व का आर्थिक केंद्र बिन्दु चीन बन चुका है। अधिकांश आर्थिक प्रवाह अभी चीन की ओर है,अपने अर्थ शक्ति तथा सैन्य शक्ति से वह पूरे विश्व को अपने प्रभाव में लेना चाहता है। साम्राज्यवादी नीतियों के कारण उसके अधिकांश पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद है,तिब्बत को हड़प कर वह भारत का भी पड़ोसी बन बैठा,जिसका प्रबल विरोध तत्कालीन भारतीय सरकार को करना चाहिये था,जो हमारी तत्कालीन सरकार का राजनीतिक एवं कूटनीतिक पराजय था। जिसके परिणाम स्वरूप 1962 में हमें चीन से शर्मनाक पराजय का सामना करना पडा।चीन ने अपनी ओर शेष विश्व से आते आर्थिक प्रवाह का उपयोग कर अपने आर्थिक एवं सैन्य गतिविधियों को अत्यधिक तीव्र गति प्रदान करने के लिए पुराने तथाकथित सिल्क रोडों ,OBOR ,रेललाइन ,बन्दरगाह ,सैनिक एवं नौसैनिक अड्डे,जैविक एवं रसायनिक प्रयोगशालाएँ (जैविक एवं रसायनिक अस्त्र बनाने वाले)बहुत बड़ी संख्या में बना चुका है तथा कई देशों में बना भी रहा है। सैन्य महाशक्ति बनने के उद्देश्य से सेना का तेजी से आधुनिकीकरण करना,विश्व के सामुद्रिक रूटों के देशों /द्वीपों पर अपने नौसैनिक/सैनिक/हवाई अड्डों का निर्माण ,आतंकवादी संगठनों को संरक्षण एवं मदद आदि देने का कार्य किया जा रहा है। जिसके बल पर वह पूरे विश्व में अपने व्यापारिक एवं सामरिक हितों को साध सके तथा विश्व में अपनी दादागिरी स्थापित कर सके ।
भारत चूंकि दक्षिण एशिया में उसका प्रबल प्रतिद्वंदी है ,इसलिए वह नहीं चाहता है की भारत सशक्त हो और किसी भी मोर्चे पर चीन को चुनौती नही दे सके,अतः वह भारत को सभी मोर्चे पर कमजोर करने ,परेशान करने और उलझाए रखने का हर संभव प्रयत्न करते रहता है। भारत के दुश्मन देश एवं पड़ोसी देशों को उदार एवं भारी ऋण,सहयोग,उपकार,सहायता देकर कृतार्थ करते रहता है तथा उन्हें भारत के विरुद्ध भड़काते भी रहता है।भारत को घेरने के लिए उसके सभी पड़ोसी देशों म्यामाँर,नेपाल,बंगलादेश,श्रीलंका ,मालद्वीप ,पाकिस्तान और अब अफगानिस्तान में भी सड़कों,रेलों,हवाई अड्डों ,बन्दरगाहों ,सैनिक एवं नौसैनिक अड्डों तथा अन्य infrastructure बना रहा है।जिससे भारत की सुरक्षा एवं सामरिक हित प्रभावित हो रहे हैं ।

चीन भारत व्यापार संतुलन




चीन और भारत के बीच आपसी व्यापार का संतुलन का पलड़ा चीन के तरफ बहुत ही झुका हुआ है।चीन के भारत को निर्यात के मुक़ाबले भारत का चीन को निर्यात बहुत ही कम है ,यानि चीन के साथ भारत का व्यापार बहुत ही घाटे में लगातार कई वर्षों से चल रहा है ,जो लगभग 90 अरब डालर तक पहुँच गया है। 2017 में व्यापार घाटा 51.72 अरब डालर था । साल दर साल भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़ता ही जा रहा है । दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार 95.5 + 18.84अरब डालर है ,जबकि सन 2000 में यह केवल 3 अरब डालर का ही था। 2008 में यह बढ़ कर 51.8 अरब डालर हो गया। अभी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार चीन ही है। अभी चीन के तरफ से 95.54 अरब डालर तथा भारत के तरफ से मात्र 18.84 अरब डालर का निर्यात होता है ।भारतीय निर्यात को चीन हतोत्साहित करता है ,जबकि गुणवत्ता के मामले में भारतीय सामग्री चीनी सामग्री से ज्यादा श्रेष्ठ हैं ।

उपरोक्त आंकड़ों से स्पष्ट है कि चीन : भारत का व्यापार 5:1 है । यानि भारत की तुलना में चीन 5 गुना अधिक निर्यात भारत को करता है ।अभी का व्यापार घाटा 76.60 अरब डालर प्रतिवर्ष है।प्रतिवर्ष 76.60 अरब डालर चीन को भारत से जा रहा है। यह तो WTO का व्यापार है ,इसके अतिरिक्त चीनी सामग्रियों का स्मगलिंग द्वारा किया गया व्यापार तथा चीनी चिकित्सा तथा तकनीकी शिक्षा संस्थानों मे अध्ययनरत भारतीय छात्रों द्वारा बहुत बड़ी राशि चीन को पहुचाई जाती है । इस प्रकार कम से कम 100 अरब डालर प्रतिवर्ष चीन को भारत से प्राप्त हो रहा है ।लेकिन इसके लिए चीन भारत पर अहसानमंद न होता है और देखें चीन किस प्रकार भारत से प्राप्त धन का उपयोग भारत के विरुद्ध ही करता है ?

1) ONE BELT ONE ROAD –O B O R 



इस परियोजना के तहत चीन पुराने सिल्क रोड के निर्माण के साथ-साथ भारत को घेरने के उद्देश्य से तिब्बत से pok को जोड़ते हुये ब्लूचिस्तान को क्रॉस कर अरब सागर(ग्वाडर बंदरगाह ) तक रोड,तिब्बत से नेपाल में भारतीय सीमा तक ,चीन से म्यामार होते हुये बांग्लादेश तक ,श्री लंका में कई हाई वे का निर्माण बहुत तेजी से हो रहे हैं ,जिससे भारतीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकता है। अफगानिस्तान जहां भारत ने काफी निवेश किया है ,वहाँ भी चीन ने सिल्क रोड बनाने की तैयारी कर ली है।

2) POK में भी सड़क निर्माण के साथ चीनी सैनिकों के लिए एक शिविर भी तैयार कर लिया है जो परियोजनाओं के निर्माण की सुरक्षा के नाम पर वहाँ तैनात किए गए हैं ,समाचार माध्यमों से सूचना मिल रही है की चीन ने पाकिस्तानी सैनिकों के लिए बंकर आदि का निर्माण भी किया है।

3) नेपाल में चीन ने भारतीय सीमा तक सड़क एवं चीन में रेल लाइन बिछा रहा है और नेपाल अभी चीन के प्रभाव में है ,युद्ध की स्थिति में चीन इन सड़कों और रेलों के माध्यम से सीधे बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर तेजी से पहुच सकता है । नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार ने अभी हाल में ही कालापानी,लिपुलोंग और लिमलधुरा पर अपना दावा पेश किया है और उसे नेपाल के नक्शे में दिखाया है , जहा से होकर मानसरोवर ,कैलाश की यात्रा भारतीय यात्रियों द्वारा किया जाता रहा है । इस क्षेत्र में अभी ही भारत के रक्षा मंत्री के द्वारा एक सड़क का उदघाटन किया गया है,वर्षों से यह क्षेत्र भारत के नियंत्रण में रहा है ,चीन को खुश करने के लिए एवं उसके उकसावे पर नेपाल के द्वारा यह आपत्ति जनक कार्रवाई की गयी है।



4)चीन के द्वारा LAC का प्रत्येक साल अतिक्रमण करते हुये आगे बढ़ कर सैनिकों का टेंट तम्बू लगाया जाता है और बाद में उस पर सड़क के साथ स्थायी संरचना का निर्माण कर लिया जाता है। यह चीन का शांति पूर्ण एवं नियमित रूप से भारतीय भूभाग पर कब्जा करने की नीति है । इस प्रकार प्रति साल मकमोहन रेखा भारत की ओर खिसकते जाती है।


5) मकमोहन लाइन का परिभाशित या निश्चित नही होने का लाभ लेना



अंग्रेज़ सर्वेयर के द्वारा बिना क्षेत्र भ्रमण किए नक्शे पर भारत एवं तिब्बत को अलग करने के लिए एक मोटा मोटी रेखा खींच दी गयी थी । इस मोटी रेखा के कारण ही आज सारा विवाद है । लेकिन तिब्बत को कभी भी इस रेखा पर कोई विवाद नही था । भारत तिब्बत सीमा पर कोई भौगोलिक पहचान चिन्ह मकमोहन के द्वारा नही चिन्हित किया गया ,जिसके कारण भारत और चीन के सेना के बीच प्रायः भिड़ंत होते रहता है । कभी भारतीय सेना तथाकथित चीनी भूभाग पर पेट्रोलिग करती है तो कभी चीनी सेना भारतीय भूभाग में घुसपैठ पेट्रोलिग के नाम पर करते है । इसी तरह चीनी सेना उस भारतीय भूभाग पर पहले अस्थायी कैंप लगाता है बाद में उस पर अपना रोड बनाना प्रारम्भ करता है । यह चाइना की पौलीशी है जो शांति पूर्वक धीरे धीरे भारतीय भूभाग पर कब्जा करते जाना है । इस प्रकार एलएसी बदलते रहता है । 


6) भारतीय सीमा के नजदीक सैनिक अड्डा एवं वायु सैनिक अड्डा/हवाई अड्डा तथा रेल लाइन बिछाना जिससे भारतीय सुरक्षा खतरे में पद जाएगी ।

7) डोकलाम तक सड़कमार्ग एवं स्थायी संरचना तैयार करना


 

डोकलाम में तिब्बत, भूटान और भारत (के सिक्किम) के बीच की सीमा रेखा मिलती है ,जहाँ से भारत का चिक़ेन नेक नजदीक है अतएव यह भारत के लिए यह अत्यंत ही सामरिक महत्व का है ,यदि इस पर चीन कब्जा कर लेता है तो पूरे नॉर्थ ईस्ट पर इसका प्रभाव पड़ सकता है । चाइना और भूटान डोकलाम पर अपना-अपना दावा करते हैं ,भारत ,भूटान के दावे का समर्थन करता है ,डोकलाम में गत गतिरोध के समय दोनों देशों की सेनाएँ लंबे अवधि तक आमने सामने रही थी ,बाद में दोनों अपने अपने जगह पर वापस हो गयी थी ,लेकिन पुन: चुपके-चुपके वहाँ चीन के द्वारा infrastructure का निर्माण कर लिया गया है । जो गंभीर चिंता का विषय है ।


8) हिन्द महासागर में चीन के द्वारा सैनिक गतिविधियों में वृद्धि
प्रायः अपने पण्डुब्बियों ,जंगी जहाजों को समुद्री दस्युओं से व्यापारिक जहाजों की रक्षा के नाम पर नौसेना को बंगला देश ,श्रीलंका एवं मालद्वीप में तैनात करते रहता है जो भारत पर रणनैतिक दबाव बढ़ाना तथा उसका एक तरह का शक्ति प्रदर्शन भी है।

9) भारत के पड़ोसी देशों में बन्दरगाह एवं नौसैनिक अड्डा का निर्माण



मयामाँर के बंगाल के खाड़ी में कयोंकपयु शहर में (70% चीन एवं 30% वर्मा के अंश दान से ) ,बांग्ला देश में पटुआखाली ( पायरा )में ,श्रीलंका का हबनटोटा में ,पाकिस्तान का ग्वाडर (जहां चीन के 60 हजार मजदूर कार्य कर रहे हैं ) में , माल द्वीप द्वारा अपने एयरपोर्ट के पुन:निर्माण एवं यहाँ से माले तक राजमार्ग पर फ्लाईओवर निर्माण ,दो दर्जन से अधिक द्वीपों को 50 साल के लिए पट्टे पर प्राप्त कर बंदरगाह एवं अन्य प्रोजेक्ट शुरू करना तथा पर्यटन के लिए फेधु-फिनोलु द्वीप भी पट्टे पर लेना एवं अपना सैन्य अड्डा बनाना ,जहां लड़ाकू विमान एवं पनडुब्बी के साथ सैनिकों को भी रखने की योजना होना।चीन के ये सभी कार्य भारत को घेरने एवं रणनीतिक रूप से वेबस करने की योजना है ।


10) चीन, भारत के पड़ोसी देशों को बहुत भारी मात्रा मे ऋण देता है ताकि उन देशों के द्वारा उक्त भारी ऋण को वापस नहीं किया जा सके । ,इस प्रकार उन्हें ऋण के जाल में फंसा लेता है ,और ऋण वापस नही होने पर उस परियोजना को लीज पर लंबे अवधि के लिए ले लेता है जैसे श्रीलंका का हबनटोटा ,बांग्लादेश का पायरा ,मालद्वीप में दो दर्जन द्वीपों में चल रहे प्रोजेक्ट ,हवाई अड्डे ,बंदरगाह आदि ,पाकिस्तान का ग्वाडर बन्दरगाह और सड़कें। इस प्रकार चीन द्वारा पहले भारी ऋण देना,उसके बाद उसे लीज पर देने के लिए बाध्य करना ,सभी परियोजनाओं में चीनी मजदूरों तथा सामग्रियों का प्रयोग करना ,स्थानीय मजदूरों एवं सामग्रियों का प्रयोग नही करने से उस देश को कोई फायदा नही होना । इस प्रकार ऋण में दिये गए धन पुनः लौट कर चीन में पहुचना ,जिससे वास्तविक आर्थिक लाभ चीन को ही होता है,बाद मे इसी परियोजना को ऋण चुकता नही होने पर बहुत लंबे अवधि के लिए लीज पर ले लिया जाता है । शेशल्श ,मौरीशश एवं कई अफ्रीकी देशों में भी यही कहानी दुहराने की प्रक्रिया जारी है ।जिससे भारतीय हितों पर कुप्रभाव पड़ता है।  

11) सुरक्षा परिषद एवं महासभा में विरोध -

सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी सदस्यता के लिए चीन ने हमेशा बिरोध किया है। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, एवं आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव का चीन ने हमेशा विरोध किया है । इसके साथ ही पाकिस्तान को IMF के ब्लैक लिस्ट में डालने के प्रस्ताव का भी हमेशा विरोध किया है । भारत द्वारा पाकिस्तान के विरूध् लाये गए प्रस्ताव का सुरक्षा परिषद ,महासभा सहित सभी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का विरोध उसकी नीति रही है ।

12) अरुणाचल प्रदेश एवं सिक्किम पर चाइना का दावा -


चीन के अनुसार अरुणाचल प्रदेश एवं सिक्किम दोनों तिब्बत के हिस्सा रहे हैं ,अरुणाचल प्रदेश में एक दलाइलमा का जन्म हुआ था ,इसलिए यह तिब्बत का हिस्सा है और तिब्बत अब चीन का हिस्सा है इसलिए ये दोनों पर चीन अपना अधिकार जमता है । जबकि तिब्बत जब आजाद था तब भी कभी तिब्बत ने इस पर दावा नहीं किया था ।

13) घटिया एवं कम गुणवत्ता वाले चीनी उत्पाद -

 चीनी सामान प्रायः घटिया एवं कम टिकाऊ होते हैं ,जल्द खराब हो जाते हैं । जबकि भारतीय सामान मजबूत और अच्छे गुणवत्ता वाले होते हैं । फिर भी भारतीय केवल सस्ते होने के आधार पर चीनी सामान खरीदना पसंद करते है, इस मानसिकता को बदलना होगा ,स्वदेशी सामान का प्रयोग करना चाहिए । अभी हाल में ही इसी कोरोना काल में कोरोना जांच के लिए घटिया टेस्ट कीट भेजा गया था जिसका जांच रिपोर्ट गलत पाया गया था ,भारत सरकार के द्वारा उस जांच कीट के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है । इसके साथ ही पाकिस्तान को N-95 मास्क के स्थान पर बहुत ही घटिया मास्क की आपूर्ति की गयी । चीन निर्मित उत्पादों में बहुत ही निम्न स्तर की सामग्री,तकनीक तथा सस्ते श्रम का प्रयोग किया जाता है जिससे उसकी गुणवत्ता बहुत ही निम्न ,कम टिकाऊपन तथा मानव स्वास्थ्य के लिए हानि कारक हो जाता है । अतः चीनी उत्पादों के प्रयोग से बचें ।

14) चीन में निर्मित मोबाइल ,टैब ,कम्प्युटर ,गजेट ,टी वी ,अन्य इलैक्ट्रिक एवं एलेक्ट्रोनिक वस्तुएँ तथा ऐप - 

जिसका क्वालिटी बहुत घटिया ,कम टिकाऊ,कम मूल्य वाले समान ,जो बहुत अधिक रेडिएशन भी पैदा करते हैं तथा स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुचाते हैं ,कँसर तथा ब्रेन ट्यूमर का कारण भी बनता है । मोबाइल एवं टैब आदि में लोड किए गए ऐप जो आपके लोड आंकड़ो को बिना आपकी जानकारी के चीन स्थित अपने सर्वर को भेजते रहते हैं । आपके बहुमूल्य आंकड़े चीन पहुच जाते हैं जिससे आपका एवं आपके देश का जासूसी होती है और अंत: आपका एवं देश का भारी नुकसान होता है । मोबाइल के माध्यम से आजकल महत्वपूर्ण दस्तावेजों का फोटो चीन निर्मित ऐप कैम स्कैनर से खींच कर रखते हैं यह ऐप आपके द्वारा सभी दस्तावेज़ चीन चला जाता है तथा मोबाइल के माध्यम से पेमेंट भी होता है,जिसमे हम अपने एकाउंट का भी उपयोग करते हैं यदि हम कोई भी चाइनीज ऐप अपने मोबाइल में रखते हैं तो उसके माध्यम से चीन आपकी जानकारियों को चुरा सकता है,ऐप के द्वारा चीन जासूसी भी करता है और आपका डाटा दूसरे के यहाँ चला जाता है तो आपका आर्थिक नुकसान भी हॉ सकता है , मोबाइल में आपका पेर्सनल ,पारिवारिक फोटो ,खाता संख्या ,आधार संहैख्या ,पैन नंबर आदि रहता है जो आपके खाता से लिंक रहता है इसके माध्यम से आपके खाते तक पहुचा जा सकता है ,इसलिए सावधान अपने मोबाइल से आज ही चाइनिज ऐप को हटाएँ ।

15) लंबे समय से व्यापार असंतुलन का कुप्रभाव -


उद्योग चौपथ हो जाता है ,उद्यमशीलता का ह्रास ,वेरोजगारी में वृद्धि ,लोगों में असंतोष ,विकास दर में कमी ,विदेशी मुद्रा भंडार में कमी ,विकास के सभी indicator में ह्रास होता है । अतएव चीन के साथ सबसे बड़े व्यापार असंतुलन को समाप्त करने के लिए लोकल यानि स्वदेशी ही खरीदें और उपयोग करें ।     

उपरोक्त बिन्दुओं के अवलोकन से स्पष्ट होता है की हमारे द्वारा जाने अनजाने जो चाइना मेड बस्तुयेँ खरीदी जाती है उसके मूल्य का अधिकांश भाग चीन पहुंचता है। और चीन के द्वारा उसका प्रयोग भारत के विरुद्ध कैसे किया जाता है ,चीन भारतीय भूभाग पर अपना कब्जा जमाने ,भारत को तोड़ने ,भारतीय अर्थ व्यवस्था को नेसनाबूत करने ,इसे कमजोर करने ,हमारे दुश्मनों का साथ देने ,हमारे देश को चारों ओर से घेरने ,हमे विपन्न बनाने के उदेश्य से काम कर रहा है ।

भारत को उपरोक्त परिस्थिति से बचाने और मजबूत बनाने के लिए हमें भारत को आत्म निर्भर बनाना होगा तथा इसके लिए मेक /मेड इन इंडिया और स्वदेशी बस्तुओं का क्रय करना होगा ,उपयोग करना चाहिए । सरकार से अधिक यहाँ की जनता का यह राष्ट्र धर्म है कि यदि भारत को शक्तिशाली ,समर्थ ,उन्नत एवं आत्म निर्भर बनाना है तो स्वदेशी या मेड इन इंडिया ,मेक इन इंडिया,स्किल इंडिया ,डिजिटल इंडिया ,शोध –अनुसंधान , तकनीकी शिक्षा को विश्व स्तरीय करना , उद्योगों एवं उद्यम शीलता का विकाश ,नवाचार को बढ़ावा देना ,चिकित्सा शिक्षा एवं शोध,छात्रों को प्रारम्भिक स्तर से व्यवशायिक शिक्षा उसके रुचि के अनुसार देने कि व्यवस्था करना होगा ,सैन्य शक्ति में सर्व श्रेष्ठ बनाना होगा ।



भारत को सर्व शक्ति मान बनाने के लिए चीनी सामानों,उत्पादों का 100% बहिष्कार अति आवश्यक है । 


भारत को सर्व शक्ति मान बनाने के लिए चीनी सामानों,उत्पादों का 100% बहिष्कार अति आवश्यक है ।जिसके फलस्वरूप हमारा धन अपने देश में रहेगा और अपने देश के उन्नति के काम आयेगा । विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ेगा ,देश शक्तिमान एवं उन्नत बनेगा । मेड/मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा। उद्यमशीलता में विकास होगा । व्यापार असंतुलन समाप्त होगा । विकास दर में अप्रत्याशित वृद्धि होगी ।


अतः आइये - 
हम सभी यह शपथ लें कि- हम देश को super power बनायेगें



सच्चे भारतीय बने :भारत में बने सामाग्री एवं उत्पाद ही खरीदें
Be Indian: Buy Indian

#ChiniKam



- शैलेंद्र

Comments

  1. Very informative article 😀

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  2. Awesome post. A broad perspective which is neglected by many people. The best thing would be to promote entrepreneurship in India and make India self reliant. That's one way of the way to make India progress in the
    right direction.

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  3. भूमंडलीकरण के दौर में असंभव प्रतीत होता है स्वउद्यमिता ज़रूरी है .

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