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IMPROVE YOUR COMMUNICATION SKILL

      अपने संवाद कौशल्य को बढ़ाएँ              IMPROVE YOUR COMMUNICATION SKILL


Image Source: MoocLab

संवाद(communication) जीवन की पहचान है।सभी जीव –जन्तु,पशु-पक्षी आपस मेँ अपने भावनाओं के सम्प्रेषण हेतु संवाद करते हैं।एक प्रजाति आपस मेँ या दूसरे प्रजातियों से शाब्दिक या अशाब्दिक (verval and non verval) रूप से अपने भावों को प्रकट करते हैं,जैसे—कुत्तों, बिल्ली के द्वारा पुंछ हिला कर या मुँह से विशेष आवाज निकालना,इसी प्रकार तोता, मैना, घोडा, गाय, बैल, शेर, चीता आदि भी अपनी अपनी आवाजों के माध्यम से अपने भावों या संवाद का प्रकटीकरण करते हैं। वहीं मधुमाखियाँ अपने विशेष प्रकार के चक्कर वाले उड़ान से संवाद प्रकट करते हैं, विभिन्न कीट वर्गीय प्राणी अपने पंखों से विशेष प्रकार के आवाज निकाल कर संवाद करते हैं ,मूक प्राणी भी अपने टेंटीकिल्स आदि के द्वारा संवादों का आदान- प्रदान करते हैं । डा0 जगदीश चन्द्र बसु ने अपने प्रयोगों के माध्यम से यह प्रमाणित किया था कि पौधे भी आपस मे बातचीत करते हैं और सुख-दुख प्रकट करते हैं। स्पष्ट है कि जीवों के लिए संवाद अति आवश्यक है और पहचान भी । प्रकृति ने जिस प्राणी को जितना अधिक संवाद कौशल्य(communication skill) प्रदान किया है वे उतने ही उन्नत होते गए हैं। 
मनुष्यों में भी देखें तो पाएगें कि जो व्यक्ति संवाद कला(art of communication)में निपुण होते हैं,उनकी पकड़ समाज में उतनी ही अधिक होती है तथा वे सामर्थ्यवान भी होते हैं।आजकल सभी नौकरियों में कई प्रकार के लिखित,मौखिक परीक्षाएँ तथा साक्षात्कार के द्वारा चयन किया जाता है,ये सभी परीक्षाएँ संवाद के प्रकार ही तो हैं।नेता, अभिनेता, अभियंता, चिकित्सक, शिक्षक, धार्मिक-आध्यात्मिक गुरु, वकील, पत्रकार, प्रोफेसनल, व्यवसायी, पुत्र, शिष्य, पति, पत्नी आदि सभी प्रकार के व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में अपनी क्षमता के अनुसार संवादों का सम्प्रेषण करते है , जो वेहतर communicator होता है वह अपने कार्य क्षेत्र मे वेहतर तथा सम्मानजनक स्थिति पाते हैं । 

अतः यदि आप अपने जीवन में और वेहतरी तथा सम्मान चाहते हैं तो आपको अपनी संवाद कुशलता बढ़ानी ही चाहिए । इसके लिए निम्न महत्वपूर्ण विंदुओं पर ध्यान दें --

वेहतर संवाद क्यों आवश्यक है ?                                                                                            

वेहतर संवाद से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है तथा समाज मे उसे प्रभुत्व एवं सम्मान जनक स्थान प्राप्त होता है ,जीवन में उतरोत्तर सफलता मिलते जाती है। इस भूमंडलीकरण, उपभोक्तावाद एवं बाजारवाद के दौर में सभी क्षेत्रों में काफी भीड़ है जिसमें आपको survive करना है, अपना स्थान बनाना है।सभी जगह प्रतियोगिता है ,प्रतिस्पर्धा है ,लोग दूसरों को पीछे छोड़ कर आगे निकलने का प्रयास करते रहते है ,आप बहुत बड़ी भीड़ के बीच फंसे हुये हैं और आपको बहुत आगे निकलना है। आप क्षमतावान रहेंगे तभी आगे निकल पाएगें।जीवन के सभी क्षेत्रों में अपनी संवाद कुशलता बढ़ा कर सफलता के नए आयाम गढ़ सकते हैं – 

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राजनीति – जो नेता जितना अच्छा communicator होगा,वह उतने ही अधिक लोंगों को आकर्षित और सम्मोहित कर पाएगा । भारत एवं विश्व के वर्तमान एवं इतिहास पर गौर करेगें तो कुछ नाम आपके स्मरण में आयेगें, जैसे – विवेकानंद, महात्मा गांधी, राधा कृष्णन, पटेल, नेहरू, इन्दिरा गांधी, जयप्रकाश नारायण, नरेंद्र मोदी, अमित साह, ओवैसी और विश्व राजनीति में लिंकन, चर्चिल, रुज्वेल्ट, मार्क्स, एंजेल्स आदि अनगिनत नाम हैं जिन्होने संवाद करने की कुशलता के आधार पर अपने झंडे गाड़े और नेतृत्व प्रदान किया । 

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अभिनय -- कुशल अभिनेता वही होता है जो अपने संवादों को कुशलता के साथ दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करता है, दर्शक उससे भावनात्मक रूप से इतना जुड़ जाते हैं कि उसके अभिनय से एकाकार होकर दर्शक हँसना, रोना, क्रोधित होना खुश होना यानि भावना में बहना शुरू कर देते है, अपने संवाद के जादू से एम.जी.रामचंद्रन, जयललिता, एन.टी.रामाराव, दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, ओम पूरी, रजनीकान्त, मीना कुमारी, नर्गिस, चार्ली चैपलिन आदि अभिनेताओं ने दर्शकों के दिलों पर राज किया तो कुछ ने इसी के लोकप्रियता के बल पर राजनीति मे प्रवेश कर उसका भी लाभ लिया। कुछ को तो भगवान ऐसा पूजा भी गया। इसी प्रकार शिक्षक, चिकित्सक, व्यवसायी, धार्मिक एवं आध्यात्मिक गुरु, अभियंता, प्रोफेशनल, आदि तथा इसके साथ निजी जीवन में पति पत्नी, बच्चे तथा अन्य सगे- संबंधी, अभिभावक, गुरु शिष्य आदि कुशलता के साथ यदि संवाद करते हैं तो उनके कार्य एवं सम्बन्धों में अच्छी तरक्की एवं प्रसिद्धि प्राप्त होती है । अन्यथा विकट परिस्थिति पैदा हो जाती है, इन सम्बन्धों की मर्यादा को बचाए रखने के लिए आपसी संवाद को कुशलता के साथ किया जाय, ताकि रिश्तों के धागों को टूटने नही दिया जाय । 

इसके विपरीत संवादहीनता (lack of communication या कम्युनिकेशन गैप ) या में संबंध टूटने लगते हैं,तलाक आदि इसके भयंकर दुष्परिणाम होते हैं। देशों के बीच युद्ध तक के नौबत आ जाते हैं । देश , राज्य, समाज, परिवार के समक्ष विकट समस्या पैदा हो सकती है, अंतत उक्त समस्या का समाधान संवाद की कुशलता से ही हो सकती है। 
उपरोक्त तथ्यों से संवाद की कुशलता की महत्ता स्पष्ट होती है। तो हम इस संबंध में कुशलता बढ़ाने हेतु कुछ निम्न तथ्यों का अवलोकन करें - 

पहले हम जाने संवाद कितने प्रकार के होते हैं ? 

संवाद दो प्रकार के होते हैं – 

क ) शब्दिक – जिसे हम शब्दों के द्वारा बोल कर ,लिख कर ,या अन्य ध्वनि संकेतों या लिखित संकेतों के माध्यम से व्यक्त करते हैं । अधिकत्तम हम 8% ही शाब्दिक संवाद का प्रयोग करते हैं ।

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ख ) अशाब्दिक – साइन लैंगवेज़, संकेतों, चेहरे के भावों, हाथ पैर, आँख, भों , शरीर के अन्य अंगों या बॉडी लैंगवेज़  के द्वारा प्रकट या अभिव्यक्त किया जाता है। वक्ता या श्रोता का शरीर के अंगों के द्वारा जाने या अनजाने में भावों को व्यक्त किया जाता है, जैसे- गुस्से में आँखों का लाल होना, रुदन में आँसू आना, मुस्कान में ओठों का फैलना, भों का सिकुडना फैलना, पुतलियों का चलना, हाथ पैर, आदि का विशेष मुद्रा में संवाद के समय चलना आदि । 

जिसका प्रभाव जाने अनजाने में श्रोता या दर्शकों पर पड़ता है। आपके किसी नौकरी हेतु साक्षात्कार के समय आपके व्यक्तित्व के मूल्यांकन कर्ता के द्वारा उपरोक्त हाव भाव का मूल्यांकन किया जाता है, आपके interviewer के द्वारा आपसे कुछ वैसे प्रश्न पूछ कर एक परिस्थिति पैदा की जाती है की जाती है एवं उससे आप कैसे react करते हैं, आप कैसे प्रश्नों का उत्तर देते है, आपकी भाव भंगिमा क्या होती है? ये अशाब्दिक भाषा बहुत कुछ वयान करते हैं, जिसका अध्ययन interviewer करता है । 
FACE IS THE INDEX OF MIND,आपके दिमाग मे क्या चल रहा है वह आपका चेहरा बता देता है, दर्शक उसे पढ़ लेता है।  

आपका आत्मविश्वास कैसा है? खुश हैं,परेशान हैं, असहज हैं, गुस्से मे हैं, पसीना आ रहा है, साहसी हैं, डरपोक है, स्मार्ट है, दब्बू हैं, कैसे बैठे हैं? आँख मिला कर बात कर रहे हैं या नही ? 

आपका शरीर आपके हावभाव के माध्यम से आपके दर्शक के साथ उक्त अशाब्दिक संवाद करता है, लेकिन आप ध्यान नही दे पाते हैं, जिससे परिणाम प्रभावित होते हैं, अतएव इस पर आपको बारीकी से ध्यान देना है और इसका सकारात्मक प्रयोग करने के अभ्यास करना चाहिये। 

अशाब्दिक संवाद के संबन्ध में अल्वर्ट मेहरेवियन ने बताया है कि एक संवाद कर्ता 7% शाब्दिक भाषा,  38% उसके शीर्षक या पद से, एवं  55%  शारीरिक मुद्रा से अपने संवादों को डेलीवर (deliver ) करता है । 

यानि जिस विषय या टॉपिक पर आप संवाद करना चाहते हैं उसका शीर्षक उस विषय के बारे में 38% विषय वस्तु को प्रकट करते हैं, लेकिन उस संवाद का 55% व्यक्ति अपने शारीरिक भाषा यानि body language के द्वारा संप्रेषित करता है । यानि आधे से अधिक संवाद हम इस language के द्वारा करते हैं।

2) SMART LOOK यानि आप आकर्षक दिखें -                                                                     

“FIRST IMPRESSION IS THE LAST” इस पर सर्व प्रथम गौर करना है क्योंकि हम जैसा दिखते हैं, हम से पहली वार मिलने वाला व्यक्ति वैसा ही धारणा बना लेता है, यदि नकारात्मक धारणा बन गयी तो इसे तोड़ने मे काफी मिहनत करना पड़ता है । इसलिए पहली वार में ही सकारात्मक छवि बनाने का प्रयास करना चाहिए । 

इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है, लेकिन इस उदाहरण में किसी कि गरीबी का मज़ाक उड़ाना मेरा उद्देश्य नही है, मेरा उद्देश्य आपको जागरूक बनाना है – तो कल्पना करें कि आप एक ट्रेन में सफर कर रहे हैं, आपके बगल का एक सीट खाली है, दो लोग खड़े हैं, जो वहाँ बैठना चाह रहे हैं, एक आदमी काफी गंदा है, बाल- दाढ़ी, नाखून आदि बढ़े हुये हैं, दांत पीले हैं अच्छी तरह साफ नहीं हैं, पोशाक भी वेतरतीव एवं गंदे हैं,आइरन किए हुये नही हैं, जूते भी बिना पौलिश के हैं, थोड़ा दुर्गंध भी आ रहा है, जबकि इसके विपरीत दूसरा व्यक्ति well dressed, clean shaved, उपयुक्त रंग का टाई, आयरन किए हुये पोशाक, polished shoes, हल्के इत्र का सुगंध भी आ रहा है। तो आप बगल कि सीट किसे offer करेगें? स्पष्ट है साफ सुथरे व्यक्ति को ही समान्यतः सीट offer किया जाएगा, क्योंकि वह good looking एवं स्मार्ट है। 

अतःआप भी अपने को अपने पौलिश किए हुये जूते से लेकर,आइरन किए हुये पोशाक, सजे सवरे बाल के साथ अपने को स्मार्ट रखें । 

फ़िटनेस पर भी ध्यान दें - शरीर स्लिम, शरीर पर अनावश्यक चर्वी न हो, पेट न निकला हो, शरीर को सुडौल रखें। वैसे तो शरीर भगवान का वरदान है, जिस रंग रूप में प्राप्त हुआ है उसे और सजा संवार कर फिट रखें । 
Image Source: 123RF.com

योग ,प्राणायाम एवं व्यायाम करें - अपने शरीर को स्वस्थ रखें, इसके लिए योग –व्यायाम करें, इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, यादाश्त मजबूत होती,आत्म विश्वास बढ़ता है, शरीर सीधा होता है, कंधे एवं छाती चौड़े होते हैं,आप स्मार्ट दिखते हैं, जिससे आप के संवाद की कुशलता पर सीधा और सकारात्मक बदलाव होता है। 
Image Source: Thomascookblog

संवाद करने के पहले पूरा प्लान कर लें - पूरी planning के साथ संवाद करने के लिए जाएँ, संवाद के उद्देश्यों के अनुसार पहले उसका गहन अध्ययन करें, एक कागज पर क्रमानुसार बिन्दु वार तथ्य, और कथ्य का प्रारूप तैयार कर लें ताकि संवाद करने के समय कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु छुट न जाएँ या जो बात पहले कहनी चाहिए थी, या उसके क्रम में परिवर्तन हो जाए और यदि क्रम में परिवर्तन होता है तो आपके संवाद की प्रभावोत्पादकता में निश्चित रूप से कमी आएगी । इसके साथ ही आपके आत्मविश्वाश में कमी भी होगी। अतएव पहले ही पूरी तैयारी एवं प्लानिंग कर लें ।
Image Source: Pegasus Legal Register


3) सोच समझ कर तौल कर ही बोलें  -                                                                                   

बोली एक अमोल है ,जो कोई बोले जानि ।

हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि । । ---कबीर

Image Source: Believe in yourself academy

जिसे बोल का महत्व पता है वह बिना शब्दों को तौले नही बोल ता । कहते हैं कि कमान से छुटा हुआ तीर और मुंह से निकला हुआ शब्द कभी वापस नही आता । इसलिए इन्हे बिना सोचे समझे इस्तेमाल नही करना चाहिए । इसलिए वाणी में नियंत्रण और मिठास की जरूरत है । 

इसके लिए अपने शब्द-सामर्थ्य को बढ़ाएँ, समानार्थी शब्द, कई शब्दों के बदले एक शब्द, विपरितार्थक शब्द आदि का stock अपने दिमाग में रखें । संवाद के समय सब से उपयुक्त शब्द का प्रयोग करें, प्रैक्टिस करने से इसमे जल्द सुधार हो सकता है । लेकिन ध्यान रखें ऐसे कठिन शब्द का भी प्रयोग न करें, जिसे श्रोता, दर्शक या पाठक समझ न सके, बोधगम्य शब्दों का प्रयोग करें, गलत शब्द का चयन आपके उद्देश्यों पर पानी फेर सकते हैं । स्थानीय शब्दों का प्रयोग करने का प्रयास करना चाहिए । 

4) Two way communication संवाद दो तरफा हो  या संप्रेषण -                                        


Image Source: JAIBB Study Materials

हम सोद्देश्य एक दूसरे से संवाद करते हैं, यदि केवल अपने तरफ से या केवल श्रोताओं के तरफ से ही बातें या संवाद हो तो उद्देश्य कि पूर्ति नही हो पाएगा ,समाधान के लिए या श्रोताओं को अपने से जोड़े रखने या अंतरंगता बनाए रखने के लिए दोनों तरफ से संवाद होना जरूरी है। श्रोताओं से बीच बीच में प्रश्नोत्तर करते रहें । अच्छे वक्ताओं को देखें तो पाएंगे कि वे श्रोताओं से किसी न किसी बहाने जुडने का प्रयास करते रहते हैं ,मसलन--–‘मैंने यहाँ अपना बचपन गुजारा है’,’मेरे पिता जी यहाँ रहते थे’,’मैं यहाँ प्रायः आता जाता रहा हूँ’ , ‘मेरा फलाने के यहाँ संबंध है’ । यानि कोई न कोई लिंक खोज कर उसे श्रोताओं से जोड़ने का प्रयास एक अच्छा वक्ता करता है । इससे श्रोता एवं वक्ता के बीच एक भावनात्मक संबंध बनता है। 

5) संवाद करने के समय माहौल को हल्का रखने का प्रयास करें -                                          

Image Source: SoolNua

कभी-कभी विषय की गंभीरता के कारण माहौल भी गंभीर हो जाता है ,जिससे परिणाम के नकारात्मक होने की संभावना हो जाती है , इससे बचने के लिए और श्रोताओं में नए उत्साह के संचार के लिए आपको एक डायरी रखनी चाहिए, जिसमे कुछ स्वस्थ मनोरंजक चुटकुलों, लघुकथाओं, प्रेरक प्रसंगों, श्लोकों, दोहों, उद्धरण आदि का संग्रह कर लें, खाली समय में उसका अवलोकन करते रहें, धीरे धीरे वह आपको याद हो जाएगा, संवाद के क्रम में श्रोताओं को सटीक उद्धरणों को सुना सकते हैं, जो आपके वक्तव्य को बहुत प्रभावी बनाएगा। यानि सोने पर सुहागा। 

6) सच्चाई एवं ईमानदारी के साथ अपने बातों को रखें -                                                          


Image Source: ExperienceLife

आजकल इंटरनेट, डाटा एवं एंडरोइड मोबाइल का जमाना है। हम आज किसी को बरगला नही सकते हैं। श्रोता या दर्शक आज काफी जागरूक हो गया है। हम गलत आंकड़े या तथ्य श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत नही कर सकते हैं। आप के कथन को श्रोता verify कर सकता है, यदि आपके द्वारा प्रस्तुत आंकड़े या तथ्य गलत पाये जाते हैं तो आपके साख पर बट्टा लग सकता है । अतएव प्रमाणिकता एवं ईमानदारी के साथ सच्चे तथ्य को ही प्रस्तुत करें । 

7) आमने सामने बैठ कर या खड़े होकर आँख से आँख मिला कर बात करें -                           
Image Source: Medium

यदि कुछ ही लोंगो से बात हो रही है तो आमने सामने बैठ कर बातें करें , यदि खड़े होकर बात कर रहे हैं तो सीधे तन कर खड़े होकर(full height) बात करें जो आपके आत्म विश्वाश को प्रदर्शित करेगा। यदि mass को communicate कर रहे हैं तो बारी बारी से सभी दर्शक या श्रोता वर्ग के तरफ देखते हुये हाथ के पॉस्चर के माध्यम से संबोधित करते रहें । मुस्कुराकर सम्बोधन करें । 

8) दूसरों को एवं परिस्थितियों को समझने का प्रयास करें -                                                  
Image Source: Elementary School Counseling

श्रोताओं , दर्शकों के आँखों में झाँके, उसके मनोभावों को, body language को पढ़ें, समझें और तदनुरूप अपने वक्तव्यों को ढालें, संवाद करने के पहले उसके मुद्दों से जुड़े व्यक्तियों या परिस्थितियों को गहराई से जाने, अध्ययन करें, तदनुरूप अपने संवाद का प्रारूप तैयार करें, बिना इसकी पूर्ण तैयारी के संवाद से बचें । 

9) दूसरों की सुनें -                                                                                                               


Image Source:  ThriveGlobal

बोलने से ज्यादा महत्वपूर्ण है दूसरों की सुनना, उनके विचारों को जाने, समझें। जब तक दूसरों को गभीरता के साथ नही सुनेगे तब तक उससे संवाद सफल नही हो पाएगा। सुनने से आपकी जानकारी बढ़ेगी । आपको बोलने के लिए मुद्दे मिलेंगे, सुनने के क्रम में जो महत्व पूर्ण मुद्दे या बातें आती हैं उन्हें उनके नाम (जिस व्यक्ति ने मुद्दा उठाया है ) के साथ नोट कर लें, ताकि अपनी बारी आने पर मुद्दा उठाने वाले के नाम के साथ उस मुद्दे का सटीक जबाब दिया जा सके । 

10) संवाद की गति एवं ध्वनि की तीव्रता औसत हो तथा उच्चारण स्पष्ट हो -                          
Image Source: Siksha- WordPress.com


संवाद करते समय अपने संवाद की गति न ज्यादा धीमी हो और न ज्यादा तेज रखें, इसी प्रकार आवाज का pitch भी सामान्य हो, न ज्यादा तेज और न ज्यादा मद्धिम हो। ताकि श्रोताओं को आपकी बातों को समझने या आपको follow करने में असुविधा हो । 

11) वाणी में दृढ़ता स्पष्ट रूप से परीलक्षित हो ढ़ूलमूल विचार न हो-                                          

Image Source: Medium

सोच समझ कर, तथ्य परक, सत्य बातें कहें उसके आगामी परिणामों, दुष्परिणामों का विश्लेषण करें यदि परिणाम हितकारी हैं तो अपने बातों पर दृढ़ रहें। बार बार अपने बातों को बदलने से आप की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगेगा । अतएव काफी सोच विचार कर ही बोलें हो सकता है उसका तात्कालिक विरोध हो, लेकिन आपकी सत्यता एवं दृढ़ता के कारण आपके विरोधी पुनः आपका समर्थन करेंगे और आपकी स्वीकार्यता बढ़ेगी । आपका stand बिलकुल firm हो । 



12) अपने अधीनस्थो एवं सहकर्मियों की प्रशंसा करें तथा उन्हें प्रोत्साहित भी करते रहें-           
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उनका मनोवल बढ़ाए । प्रशंशा या प्रोत्साहन एक रामबाण औषधि है, जिससे उनका आपका प्रति विश्वास जीतने का फार्मूला है ,प्रोत्साहन उनके लिए टौनिक के रूप मे असर करता है। प्रत्येक क्षेत्र मे इसके सकारात्मक परिणाम आएगें, आपका उत्पादन बढ़ जाएगा ,आपकी उपलब्धि बढ़ेगी, आपकी लोकप्रियता बढ़ेगी और आपकी उन्नति भी होगी । 

13) वाणी ऐसी बोलिए, मन का आपा खोय -                                                                       
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औरन को शीतल करे ,आपहु शीतल होय।।------रहीम 

मन में अवस्थित क्रोध को त्याग कर मीठी वाणी बोलिए जिससे दूसरों को शीतलता तो होती ही है साथ ही अपने मन को भी शांति एवं शीतलता प्राप्त होती है । 

और यदि शांति है तो वहाँ उन्नति भी है। घर-परिवार,समाज में शांति बनाए रखने के लिए , जो की बहुत ही महत्व पूर्ण है , क्रोध को त्यागना और मीठे वचन बोलना चाहिए । शांति में ही सृजन है, शांतिपूर्ण वातावरण में ही समाज आगे बढ़ सकता है। 



14)बड़े बड़ाई न करे ,बड़े न बोले बोल -                                                                               
Image Source: UMN Extension


रहिमन हीरा कब कहे लाख टका मेरा मोल।। ----रहीम

कभी अपनी बड़ाई न करें , अपने कर्मों के द्वारा अपनी पहचान बनाएँ । इसी से लोंगो में आपकी साख भी बढ़ेगी। अपनी बड़ाई करने से एक नकारात्मक संदेश श्रोताओं को मिलता है। यदि आपकी बड़ाई सत्य से मेल नहीं खाता है तो आप लोगों का अपने प्रति विश्वास खो देंगे। कुशल वक्ता को इससे परहेज करना चाहिए ।

15)यथा चितम तथा वाचो यथा वाचस्तथा क्रिया: -                                                                 
Image Source: Psychalive

चित्ते वाचि क्रिया याच साधु नामे क्रयता ।। 

अच्छे लोग वही बात बोलते हैं जो उनके मन में होती है,अच्छे लोग जो बोलते हैं वही करते हैं, ऐसे पुरुषों के मन, वचन व कर्म में समानता होती है । कुशल संवाद कर्ता को मन से, कर्म से एवं वचन से एक होना चाहिए । इसका आपके श्रोताओं पर जबरदश्त प्रभाव पड़ता है। श्रोता हमेशा वक्ता को हर प्रकार की कसौटी पर परखता रहता है, यदि किसी कसौटी पर वक्ता, श्रोता के कसौटी पर खरा नहीं उतरता है तो वह वक्ता को अपनी नजरों से गिरा देता है। इसलिए वक्ता को मनसा क्रमना वाचानाम एक रहने के प्रयास करना चाहिए । 


16) अच्छे वक्ताओं के भाषण –प्रवचन को सुनें -                                                                 


Image Source: Good Choices Good Life

 जैसे कुछ सीखने - जानने के लिए किसी गुरु, उस्ताद या पंडित के पास शिक्षा –दीक्षा के लिए उनके शरण में जाते हैं, उसी प्रकार अच्छा कम्यूनिकेटर बनने के लिए उनके भाषणों, प्रवचनों, निबंधों आदि को सुनें-पढ़ें या उनकी औडियो या विडियो रिकौर्डिंग सुने, यह ध्यान दें की वह कम्यूनिकेटर कैसे बातचीत को प्रारम्भ करते हैं, कैसे विषय प्रवेश करते हैं, भाषा कैसी है, ध्वनि का उतार चढ़ाव कैसा है, श्रोता कैसे response कर रहे हैं, पोशाक कैसा है, श्रोताओं को कैसे अपने से जुड़ा रखते हैं । 

17) भावनाओं के अनुसार अपने स्वर की तीव्रता मे उतार चढ़ाव करें-                                   
Image Source: Afzal Rahim's Blog- WordPress.com

 आपको भाषण या वक्तव्य के क्रम में कई प्रकार की भावनाओं से गुजरना पड़ेगा ,उसके अनुसार ही अपने स्वर की तीव्रता एवं बॉडी language तथा अशाब्दिक भाषा का भी प्रयोग करने की आदत डालें । भावनात्मक रूप से अपने से जोड़ते हैं,उनका बॉडी language कैसा है,कैसे अशाब्दिक भाषा का प्रयोग करते हैं । इसे अपने लिए उदाहरण माने ,उसका अनुप्रयोग करें । 

उपरोक्त कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विचार करेंगे तो पाएगे कि आज के अच्छे कम्यूनिकेटर के संवाद में ये सारे बिन्दु पाये जाते हैं। इन बिन्दुओं को वे अपने संवाद में समाविष्ट करते हैं। माननीय नरेंद्र मोदी जी, अमित साह जी, ओवैसी जी के भाषणों को देखे तो पाएगे कि वे स्थानीय भाषा में पहले सभी का अभिवादन करते हैं उसके बाद स्थानीय भाषा में कुछ पंक्तियाँ भी बोलते हैं, कुछ कागज के टुकड़ों पर बिन्दु नोट किए रहते हैं, शाब्दिक –अशाब्दिक भाषा का प्रयोग करते हुये, eye contact बनाते हुए, बीच बीच में चुटकुला, प्रेरक प्रसंग, लघु कथा, श्लोक, उक्ति आदि का प्रयोग करते हैं, आकर्षक परिधान में, आत्म विश्वाश से लवरेज रहते हैं। आप भी अपनी संवाद कुशलता को बढ़ाने के लिए ऊपर के कुछ टिप्स को अपनायेँ, full size आईने के सामने अच्छे पोशाक में सज-सवंर कर, पूरे सीधे खड़े होकर किसी विषय पर, शाब्दिक और अशाब्दिक भाषा का प्रयोग करते हुये तथा यह कल्पना करते हुये कि आप जनसंबाद या भाषण कर रहे है, संबाद के बिन्दुओं को पूर्व में एक कागज पर सजा कर लिखे,आवश्यकता पड़ने पर ही उसका प्रयोग करें ,अपनी स्पष्ट उच्चारण एवं बोलने कि गति पर भी ध्यान दें ,पूर्व मे बताए गए अन्य बिन्दुओं के अनुपालन करने का भी प्रयास करें । आपके कुछ ही दिनों के ईमानदार अभ्यास के बाद आप एक अच्छे वक्ता के रूप में अपने को प्रतिस्थापित कर पाएंगे। यदि किसी मंच पर संवाद के लिए वुलावा या प्रस्ताव आता है तो उस सुनहरे अवसर को नही छोड़ें, छोटे से छोटे मंच का उपयोग करें, इससे आपका आत्म विश्वास बढ़ेगा, बोलने मे हमेशा सकारात्मक रहें, ईमानदार रहें, किसी कि निंदा या शिकायत से अपने को अलग रखें, इससे आपकी नकारात्मक छवि श्रोताओं में बनती है, पूरे आत्म विश्वास के साथ खड़े होकर, आँख से आँख मिला कर संबाद करें । आशा है आप अपने इन प्रयासों से अच्छे वक्ता के रूप में देश और समाज को सही नेतृत्व प्रदान करेगें । 

धन्यवाद
 शैलेंद्र


Comments

  1. Very well explained !

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  2. I believe communication is one of the most important aspect to succeed in life. Very well written, very informative.

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  3. Indeed Good and proper communication helps us to progress and lead a happy life ! This article is very good and covers all essential points on why and how to communicate !!

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  4. आपने तो संवाद के बारे में बहुत ही सुन्दर लेख लिखें हैं। जीवों भाव से भी संवाद का संप्रेषण बनता है तथा संवाद लोग व्यक्तित्व के बारे में पता चलता है।

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